एक टुकड़ा शब्द लहू-लुहान तड़फर्ता रहा देर तक और दम तोड़ दिया आखिर. सारे आवाज़ एक बार फिर तोड़ दिए थे फर्श पे पटक के उसने. सन्नाटा दीवार के कानो पे बर्फ हो गया था और जिंदा बचे अल्फाज़ पूरी ताकत से अपनी कंपकंपी संभाल रहे थे. ऐसा हीं हो जाया करता था अक्सर. ...
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