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जनवरी 2008

 

• रात को अलाव में काटा है

रात को अलाव में काटा है नींद आँखों में गिरती हीं नहीं. साहिल पे गया था कल शाम को रेत पे तेरा नाम लिख के आया था. एक सुकून है तेरे नाम में याद करता हूँ तो सांस आती है. रिश्ते टूट कार अलग हो जाते हैं तो शायद दो रिश्ते बन जाते हैं. जो आशियाना हम नही बना सके ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: शायद इसे हाइकू ...
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• इंकार करती हैं तेरी यादें फींकी पड़ने से

इनकार करती हैं तेरी यादें फींकी पड़ने से .दर्ज करती हैं ये हर रात मेरे ख्वाबों पे अपना बोसा .जिंदा करती हैं खामोशियों को ये लबेन तेरी मेरे लबों पे गुलाब रखती हैं. मैं इस पल में हूँ और ये बीती रैना पर ये ज़्यादा जिंदा हैं .तेरी ठहरी आवाज़ों पे कान रख के ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• बातें जगह घेरती हैं

बातें आती हैं जाती हैं पर खत्म नही होतींढूँढती रहती है अफ़सानों में अपनी जगहखोलती रहती हैं पुरानी सन्दुकेन यादों की पुरानी जंग लगी तहें.बातें दूर तक साथ जाती हैंगर उन्हें किसी नम रसीले गले का सहारा मिल जाता हैगर किसी अहसास के साथ उन्हें किसी अफ़साने में ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• मुझे तलाश है

मुझे तलाश है

उनकी छुअन अब नही लगतीं वे खाली-खाली से रह गये मौसम हैं पेड़ो पे लद भी जाएँ तो शाखें नही झुकतीं वो जो धरती के सबसे नायाब मौसम थे, वो भरे-पुर महकते मौसम फ़िज़ाओं से जाने कैसे गायब होते गये. अब ना तो उनके स्पर्श घुमड़ते हैं आसमान में और, ना हीं उनकी बूंदे ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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• एक टुकड़ा शब्द

एक टुकड़ा शब्द लहू-लुहान तड़फर्ता रहा देर तक और दम तोड़ दिया आखिर. सारे आवाज़ एक बार फिर तोड़ दिए थे फर्श पे पटक के उसने. सन्नाटा दीवार के कानो पे बर्फ हो गया था और जिंदा बचे अल्फाज़ पूरी ताकत से अपनी कंपकंपी संभाल रहे थे. ऐसा हीं हो जाया करता था अक्सर. ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: थोड़ा सा आसमान
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